सब डमरू वाले की करनी है
"सब डमरू वाले की करनी है।"
न कुछ आप कर रहे हैं, न कुछ मैं कर रहा हूं।
"दुनियां एक तमाशा है, मजा लीजिए।"
#मेरे_गुरु_शिव
#दया_कर_दीजिए
🌌 क्या सचमुच आप कुछ कर रहे हैं… या आपसे करवाया जा रहा है?
क्या कभी ऐसा लगा कि बहुत कोशिशों के बाद भी परिणाम आपके अनुसार नहीं आते?
या कभी बिना विशेष प्रयास के ही सब कुछ अपने आप सहज हो जाता है?
तभी भीतर से एक स्वर उठता है—
“सब डमरू वाले की करनी है…” 🔱
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🔱 डमरू वाला कौन?
डमरू वाले से आशय है Shiva — वह चेतना जो सृष्टि का नाद है, गति है, कंपन है।
डमरू का प्रत्येक स्पंदन सृजन और लय का प्रतीक है।
जब डमरू बजता है—
कहीं जन्म होता है
कहीं परिवर्तन
कहीं अंत
और इस पूरे नृत्य को शास्त्रों में “तांडव” कहा गया है।
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🎭 “दुनिया एक तमाशा है” — इसका अर्थ क्या है?
यह वाक्य भागने या निष्क्रिय होने का संदेश नहीं देता।
यह स्मरण कराता है कि—
हम कर्त्ता नहीं, निमित्त हैं।
हम खिलाड़ी नहीं, खेल का हिस्सा हैं।
हम निर्देशक नहीं, मंच पर अभिनय करते पात्र हैं।
जब यह समझ पक्की हो जाती है, तो जीवन का बोझ हल्का हो जाता है।
आप काम करते हैं…
पर भीतर जानते हैं—
करवाने वाला कोई और है।
यही भाव भगवद् गीता में भी झलकता है, जहाँ Krishna अर्जुन से कहते हैं—
“तू निमित्त मात्र बन।”
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🌊 तो क्या प्रयास न करें?
नहीं।
प्रयास तो होगा ही — क्योंकि वही तो भूमिका है।
पर अंतर यह होगा कि—
परिणाम का अहंकार नहीं होगा
असफलता का अवसाद नहीं होगा
सफलता का उन्माद नहीं होगा
जब हम जीवन को एक लीला, एक नाटक की तरह देखने लगते हैं, तब मन हल्का हो जाता है।
तभी समझ आता है—
न आप कुछ कर रहे हैं, न मैं कुछ कर रहा हूं।
सब डमरू वाले की करनी है।
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🧘 यह स्मरण कैसे स्थायी बने?
।।प्रणाम।।
"आइये भगवान शिव को 'अपना' गुरु बनाया जाय"...
3 सूत्रों की सहायता से:
1. दया मांगना:
"हे शिव आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूँ, मुझ शिष्य पर दया कर दीजिये" (मन ही मन)।
2. चर्चा करना:
दूसरों को भी यह सन्देश देना कि, "आइये भगवान शिव को 'अपना' गुरु बनाया जाय"।
3. नमन करना:
अपने गुरु को प्रणाम निवेदित करने की कोशीश करना। चाहें तो "नमः शिवाय" का प्रयोग कर सकते हैं (मन ही मन: साँस लेते समय नमः, छोड़ते समय शिवाय)
https://bit.ly/3Dnez7T
धीरे-धीरे जीवन संघर्ष नहीं, अनुभव बन जाता है।
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🌺 निष्कर्ष
जब आप यह स्वीकार लेते हैं कि जीवन एक दिव्य आयोजन है,
तो शिकायत की जगह आनंद ले लेता है।
दुनिया सचमुच एक तमाशा है—
पर तमाशा देखने वाला जब जाग जाता है,
तो वही तमाशा साधना बन जाता है।
🔱 मजा लीजिए… क्योंकि मंच भी उसका है, पटकथा भी उसकी है, और हम सब उसके पात्र हैं।
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📌 डिस्क्लेमर
यह पोस्ट आध्यात्मिक दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करती है। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत जिम्मेदारी से विमुख करना नहीं है, बल्कि जीवन के प्रति साक्षीभाव और समर्पण की भावना को प्रोत्साहित करना है। व्यावहारिक निर्णय सदैव विवेक और परिस्थितियों के अनुसार ही लें।
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